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अद्य संस्कृतं शिक्षामहे – भागः १० : मैत्री

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By SanskritLearn

अद्य संस्कृतं शिक्षामहे – भागः १० मैत्री — मित्रता (Friendship)

अद्य वयं "मैत्री" इति शब्दस्य अर्थं प्रयोगं च शिक्षामहे। मैत्री मानवजीवनस्य अमूल्या सम्पद् अस्ति। मित्रम् सुखे दुःखे च सहायकं भवति। विश्वासः, स्नेहः, परस्परः सम्मानः च मैत्र्याः आधाराः सन्ति।

शब्दपरिचयः मैत्री = मित्रता मित्रम् = मित्र सख्यम् = मित्रता सहायकम् = सहायता करने वाला विश्वासः = भरोसा सरलवाक्यप्रयोगाः

१. मैत्री जीवनस्य अमूल्या सम्पद् अस्ति। मित्रता जीवन की अमूल्य सम्पत्ति है।

२. सत्यमित्रम् सर्वदा सहाय्यं करोति। सच्चा मित्र सदैव सहायता करता है।

३. अस्माभिः सर्वैः सह मैत्री करणीया। हमें सभी के साथ मित्रता करनी चाहिए।

४. मैत्र्या प्रेम सौहार्दं च वर्धते। मित्रता से प्रेम और सद्भाव बढ़ता है।

५. मित्रे विश्वासः आवश्यकः अस्ति। मित्र पर विश्वास आवश्यक है।

६. उत्तमं मित्रं सत्यं वदति। अच्छा मित्र सत्य बोलता है।

७. मैत्री स्वार्थेन न, प्रेम्णा तिष्ठति। मित्रता स्वार्थ से नहीं, प्रेम से बनी रहती है।

८. मित्रस्य दुःखे सहाय्यं कर्तव्यं भवति। मित्र के दुःख में सहायता करनी चाहिए।

व्याकरणम्

मित्रम् — नपुंसकलिङ्गशब्दः।

विशेषप्रयोगाः मित्रं कुरु। — मित्र बनाओ। मित्रस्य साहाय्यं कुरु। — मित्र की सहायता करो। मित्रे विश्वासं कुरु। — मित्र पर विश्वास करो। सर्वैः सह सौहार्देन वस। — सभी के साथ सद्भावपूर्वक रहो। स्वयं प्रयास करें हिन्दी से संस्कृत में अनुवाद कीजिए— सच्चा मित्र कभी साथ नहीं छोड़ता। हमें सभी के साथ मित्रता करनी चाहिए। मित्र संकट के समय सहायता करता है। मैं अपने मित्र का सम्मान करता हूँ। मित्रता से जीवन सुखमय बनता है। उत्तराणि सत्यमित्रं कदापि साथं न त्यजति। अस्माभिः सर्वैः सह मैत्री करणीया। मित्रं सङ्कटसमये सहाय्यं करोति। अहं मम मित्रस्य सम्मानं करोमि। मैत्र्या जीवनं सुखमयं भवति। अद्यतनं भाषासूत्रम्

मैत्री मानवजीवनस्य श्रेष्ठा सम्पद् अस्ति।

अर्थः: मित्रता मनुष्य के जीवन की सबसे बड़ी सम्पत्ति है।

अद्यतनः लघुसङ्कल्पः

अद्य अहं सर्वैः सह सौहार्देन व्यवहारं करिष्यामि।

अर्थः: आज मैं सभी के साथ प्रेम और सद्भाव से व्यवहार करूँगा।

प्रेरणासुभाषितम्

विद्या मित्रं प्रवासेषु।

भावार्थः: विदेश या यात्रा में विद्या ही मनुष्य की सच्ची मित्र होती है।