मतुप्, ठक्, त्व, तल् प्रत्यय | CBSE Class 10 संस्कृत
By SanskritLearn
मतुप्, ठक्, त्व, तल् प्रत्यय (CBSE Class 10)
संस्कृत में तद्धित प्रत्यय संज्ञा या विशेषण शब्दों के साथ जुड़ते हैं। इनसे नए शब्द बनते हैं। CBSE में ये चार प्रत्यय महत्वपूर्ण हैं—
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1. मतुप् प्रत्यय [वत् ,मत्]
यह प्रत्यय “जिसके पास हो” या “वाला” के अर्थ में आता है।
नियम
मतुप् प्रत्यय जुड़ने पर सामान्यतः **वान् / वती / वत्/मान्/मती/मत् जुटता है।
उदाहरण
- ज्ञान + मतुप् = ज्ञानवान् (ज्ञानी व्यक्ति)
- बुद्धि + मतुप् = बुद्धिमान् (बुद्धि वाला)
रूप
| लिङ्ग | रूप |
|---|---|
| पुंल्लिङ्ग | ज्ञानवान् |
| स्त्रीलिङ्ग | ज्ञानवती |
| नपुंसकलिङ्ग | ज्ञानवत् |
प्रयोग
- सः ज्ञानवान् अस्ति।
- सा ज्ञानवती अस्ति।
- तत् ज्ञानवत् पुस्तकम् अस्ति।
पुल्लिंग-भवत्,स्त्रीलिंंग -नदी, नपुंसकलिङ्ग -जगत्]
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2. ठक् प्रत्यय
यह प्रत्यय सम्बन्ध या विशेषता का बोध कराता है।
नियम
ठक् प्रत्यय लगने पर प्रायः इक बनता है।
उदाहरण
- पुराण + ठक् = पौराणिकः
- वर्ष + ठक् = वार्षिकः
- वेद + ठक् = वैदिकः
प्रयोग
- एषः वैदिकः ग्रन्थः अस्ति।
- अस्य विद्यालयस्य वार्षिकः उत्सवः भवति।
पु• -बालक ,स्त्री• नदी नपुंसकलिङ्ग -फलम्
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3. त्व प्रत्यय[अंत में त्वम् ]
यह प्रत्यय किसी गुण या भाव का बोध कराता है।
नियम
त्व प्रत्यय लगने पर भाववाचक संज्ञा बनती है।
उदाहरण
- महत् + त्व = महत्त्वम्
- मित्र + त्व = मित्रत्वम्
- सम + त्व = समत्वम्
प्रयोग
- जीवने मित्रत्वम् आवश्यकम्।
- गीता समत्वस्य शिक्षां ददाति।
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4. तल् प्रत्यय [अंत मे ता]
यह प्रत्यय भी भाववाचक शब्द बनाता है, पर सामान्यतः स्त्रीलिङ्ग रूप देता है।
नियम
तल् प्रत्यय का रूप प्रायः ता बनता है।
उदाहरण
- मित्र + तल् = मित्रता
- सुन्दर + तल् = सुन्दरता
- सरल + तल् = सरलता
प्रयोग
- मित्रता जीवनस्य आधारः अस्ति।
- सुन्दरता मनः हरति।
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त्व और तल् में अन्तर
| त्व | तल् |
|---|---|
| नपुंसकलिङ्ग भाववाचक | स्त्रीलिङ्ग भाववाचक |
| महत्त्वम् | सुन्दरता |
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परीक्षा हेतु महत्वपूर्ण उदाहरण
ज्ञानवान्, बुद्धिमान्, पौराणिकः, वैदिकः, वार्षिकः, मित्रत्वम्, महत्त्वम्, मित्रता, सुन्दरता, सरलता।