प्रमुख संस्कृत आदर्श वाक्य एवं उनके प्रामाणिक स्रोत
प्रमुख संस्कृत आदर्श वाक्य, सूक्तियाँ एवं श्लोक उनके प्रामाणिक स्रोतों सहित। मुण्डकोपनिषद्, बृहदारण्यकोपनिषद्, भगवद्गीता, मनुस्मृति, महाभारत एवं अन्य संस्कृत ग्रन्थों से चयनित प्रेरणादायक वाक्य।
By SanskritLearn
प्रमुख आदर्श वाक्य एवं उनके प्रामाणिक स्रोत
- सत्यमेव जयते।
स्रोतः — मुण्डकोपनिषद् ३.१.६
सत्यमेव जयते नानृतं सत्येन पन्था विततो देवयानः। येनाक्रमन्त्यृषयो ह्याप्तकामा यत्र तत् सत्यस्य परमं निधानम्॥
मूल उपनिषद्-पाठ में “सत्यमेव जयते” स्पष्ट रूप से प्राप्त होता है।
- गायत्री मन्त्रः
स्रोतः — ऋग्वेदः ३.६२.१०
ॐ भूर्भुवः स्वः। तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि। धियो यो नः प्रचोदयात्॥
टिप्पणी: गायत्री मन्त्र का मूल मन्त्र ऋग्वेद के ३.६२.१० में है।
- असतो मा सद्गमय।
- तमसो मा ज्योतिर्गमय।
- मृत्योर्मा अमृतं गमय।
स्रोतः — बृहदारण्यकोपनिषद् १.३.२८
असतो मा सद्गमय। तमसो मा ज्योतिर्गमय। मृत्योर्मा अमृतं गमय॥
ये तीनों एक ही मन्त्र के अंश हैं।
- महामृत्युञ्जय मन्त्रः
स्रोतः — ऋग्वेदः ७.५९.१२
ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥
- विद्या ददाति विनयम्।
स्रोतः — नीतिशास्त्रीय सुभाषित
विद्या ददाति विनयं विनयाद् याति पात्रताम्। पात्रत्वाद् धनमाप्नोति धनाद् धर्मं ततः सुखम्॥
यह प्रसिद्ध नीतिसुभाषित है और विभिन्न नीति-ग्रन्थों में उद्धृत मिलता है।
- कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन।
स्रोतः — श्रीमद्भगवद्गीता २.४७
कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन। मा कर्मफलहेतुर्भूर्मा ते सङ्गोऽस्त्वकर्मणि॥
यह गीता के द्वितीय अध्याय का ४७वाँ श्लोक है।
- अहिंसा परमो धर्मः।
स्रोतः — महाभारतम्, अनुशासनपर्व
यह प्रसिद्ध उक्ति महाभारत के अनुशासनपर्व में प्राप्त होती है।
- वीरभोग्या वसुन्धरा।
स्रोतः — प्रसिद्ध सुभाषित/लोकोक्ति
वीरभोग्या वसुन्धरा।
- यतो धर्मस्ततो जयः।
स्रोतः — महाभारतम्
यतो धर्मस्ततो जयः।
यह महाभारत में अनेक स्थलों पर प्राप्त होने वाला प्रसिद्ध वाक्य है।
- सत्यं शिवं सुन्दरम्।
स्रोतः — प्रचलित दार्शनिक/सांस्कृतिक सूक्ति
- धर्मो रक्षति रक्षितः।
स्रोतः — मनुस्मृतिः ८.१५
पूरा श्लोक—
धर्म एव हतो हन्ति धर्मो रक्षति रक्षितः। तस्माद्धर्मो न हन्तव्यो मा नो धर्मो हतोऽवधीत्॥
मनुस्मृति ८.१५ में यह पाठ स्पष्ट रूप से मिलता है।
महाभारत में भी इसका पाठ मिलता है, किंतु वहाँ उत्तरार्ध का पाठ भिन्न रूप में आता है। मनुस्मृतिः ८.१५; महाभारतम्, वनपर्व ३१३.१२८ में भी पाठान्तर।
- यम-नचिकेता-संवादः
स्रोतः — कठोपनिषद्
यह कोई एक आदर्श वाक्य नहीं, बल्कि कठोपनिषद् में यम और नचिकेता के मध्य हुआ प्रसिद्ध संवाद है।
- सर्वे भवन्तु सुखिनः।
स्रोतः — प्रचलित मंगलकामना/शान्तिप्रार्थना
सर्वे भवन्तु सुखिनः। सर्वे सन्तु निरामयाः। सर्वे भद्राणि पश्यन्तु। मा कश्चिद् दुःखभाग्भवेत्॥
- वसुधैव कुटुम्बकम्।
स्रोतः — महोपनिषद् ६.७१
अयं निजः परो वेति गणना लघुचेतसाम्। उदारचरितानां तु वसुधैव कुटुम्बकम्॥
यहाँ “वसुधैव कुटुम्बकम्” का प्रामाणिक शास्त्रीय स्रोत महोपनिषद् है।
- यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवताः।
स्रोतः — मनुस्मृतिः ३.५६
यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवताः। यत्रैतास्तु न पूज्यन्ते सर्वास्तत्राफलाः क्रियाः॥
मनुस्मृति ३.५६ में यह श्लोक स्पष्ट रूप से मिलता है।