प्रमुखशिक्षासंस्थानानां संस्कृतध्येयवाक्यानि — संस्कृतसुभाषितसंग्रहः
प्रमुख भारतीय शिक्षासंस्थानों के संस्कृत ध्येयवाक्यों का सुंदर एवं ज्ञानवर्धक संग्रह। NCERT, CBSE, UGC, केन्द्रीय विद्यालय, नवोदय विद्यालय, IIT खड़गपुर, JNU आदि के ध्येयवाक्य संस्कृत में अर्थ सहित।
By SanskritLearn
प्रमुख शिक्षासंस्थानानां ध्येयवाक्यानि क्र. शिक्षासंस्थानम् संस्कृतध्येयवाक्यम्---- स्रोतः
- NCERT विद्ययामृतमश्नुते।---- ईशावास्योपनिषत्
- CBSE असतो मा सद्गमय।----- बृहदारण्यकोपनिषत्
- UGC ज्ञान-विज्ञानं विमुक्तये। —--विष्णुपुराण /संस्थागत ध्येेय वाक्य
- केन्द्रीयविद्यालयसङ्गठनम्--- तत् त्वं पूषन्नपावृणु।--- ईशावास्योपनिषत्
- नवोदयविद्यालयसमितिः--- प्रज्ञानं ब्रह्म। ---ऐतरेयोपनिषत्
- IIT खड़गपुर-- योगः कर्मसु कौशलम्।-- श्रीमद्भगवद्गीता
- JNU --तेजस्वि नावधीतमस्तु।-- तैत्तिरीयोपनिषत्
अन्य प्रेरणादायक संस्कृतध्येयवाक्यानि
१. विद्यां ददाति विनयम्। अर्थः — विद्या विनय प्रदान करती है।
२. सा विद्या या विमुक्तये। अर्थः — वही विद्या है जो मुक्ति का मार्ग दिखाए।
३. उद्यमेन हि सिद्ध्यन्ति कार्याणि न मनोरथैः। अर्थः — कार्य परिश्रम से सिद्ध होते हैं, केवल इच्छा से नहीं।
४. चरैवेति चरैवेति। अर्थः — निरन्तर आगे बढ़ते रहो।
५. तमसो मा ज्योतिर्गमय। अर्थः — अन्धकार से प्रकाश की ओर ले चलो।
६. सत्यं वद। धर्मं चर। अर्थः — सत्य बोलो और धर्म का आचरण करो।
७. न हि ज्ञानेन सदृशं पवित्रमिह विद्यते। अर्थः — इस संसार में ज्ञान के समान पवित्र कुछ भी नहीं है।
८. योगः कर्मसु कौशलम्। अर्थः — कर्म में कुशलता ही योग है।
९. ज्ञानं परमं बलम्। अर्थः — ज्ञान ही परम शक्ति है।
१०. वसुधैव कुटुम्बकम्। अर्थः — सम्पूर्ण पृथ्वी ही एक परिवार है।
समापन-वाक्यम्:
“संस्कृतं ज्ञानस्य, संस्कृतेः, संस्कारस्य च अमूल्यं साधनम् अस्ति।” संस्कृत ज्ञान, संस्कृति और संस्कार का अमूल्य साधन है।
- NCERT — “विद्ययामृतमश्नुते।”
अर्थ: विद्या के द्वारा अमृत अर्थात् अमरत्व को प्राप्त किया जाता है।
- CBSE — “असतो मा सद्गमय।”
अर्थ: मुझे असत्य से सत्य की ओर ले चलो।
- UGC — “ज्ञान-विज्ञानं विमुक्तये।”
अर्थ: ज्ञान और विज्ञान मुक्ति के साधन हैं।
- केन्द्रीय विद्यालय सङ्गठन — “तत् त्वं पूषन्नपावृणु।”
अर्थ: हे पूषन् (सूर्यदेव)! उस सत्य के आवरण को हटा दीजिए।
- नवोदय विद्यालय समिति — “प्रज्ञानं ब्रह्म।”
अर्थ: प्रज्ञान अर्थात् चेतन ज्ञान ही ब्रह्म है।
- IIT खड़गपुर — “योगः कर्मसु कौशलम्।”
अर्थ: कर्मों में कुशलता ही योग है।
- JNU — “तेजस्वि नावधीतमस्तु।”
अर्थ: हमारी पढ़ी हुई विद्या तेजस्वी एवं प्रभावशाली हो।
“सा विद्या या विमुक्तये” एक से अधिक शिक्षण संस्थानों का ध्येयवाक्य है। उदाहरण के लिए:
बनस्थली विद्यापीठ — “सा विद्या या विमुक्तये” बिड़ला इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (BIT), मेसरा — यही ध्येयवाक्य है। गुजरात विद्यापीठ — यही ध्येयवाक्य प्रयुक्त होता है। बॉम्बे टीचर्स ट्रेनिंग कॉलेज — इसका भी संस्थागत Motto यही है। स्रोत: यह पंक्ति विष्णुपुराण 1.19.41 के श्लोक का अंश है।
तत्कर्म यन्न बन्धाय सा विद्या या विमुक्तये। अर्थ: जो विद्या मुक्ति प्रदान करे, वही सच्ची विद्या है।