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Class 9

Sharda chapter 2

Question · asked by Ananya

Sukhas mulam dharma dharmasya mulmah arth

Answer · SanskritLearn team · 30 Oct 2026

सुखस्य मूलं धर्मः, धर्मस्य मूलम् अर्थः।

उत्तरम्— सुखस्य मूलं धर्मः अस्ति। धर्मस्य मूलम् अर्थः अस्ति। अर्थस्य मूलं राज्यं भवति। राज्यस्य मूलम् इन्द्रियाणां जयः अस्ति। इन्द्रियजयस्य मूलं विनयः अस्ति। विनयस्य मूलं वृद्धोपसेवा अस्ति। अतः मनुष्येण सदैव धर्मस्य पालनं कर्तव्यम्।

हिन्दी अर्थ—

सुख का मूल धर्म है और धर्म का मूल अर्थ (धन) है। अर्थ का मूल राज्य है और राज्य का मूल इन्द्रियों पर विजय प्राप्त करना है। इन्द्रिय-निग्रह का मूल विनय है तथा विनय का मूल बड़ों की सेवा करना है। अतः मनुष्य को सदैव धर्म का पालन करना चाहिए।

शिक्षा—धर्म, विनय और सदाचार ही सुखी एवं सफल जीवन के आधार हैं।अभ्यास के लिए sanskritlearn.com

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