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Script — Devanagari

विधिलिङ् लकार — इच्छा, प्रार्थना एवं सम्भावना | संस्कृत व्याकरण

विधिलिङ् लकार का प्रयोग सामान्यतः इच्छा, प्रार्थना, आदेश/अनुमति तथा सम्भावना आदि भावों को व्यक्त करने के लिए किया जाता है। अंग्रेज़ी में इसके अर्थ के लिए प्रायः should, may, ought to आदि शब्दों का प्रयोग होता है।

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विधिलिङ् लकार — इच्छा, प्रार्थना एवं सम्भावना विधिलिङ् लकार का प्रयोग सामान्यतः इच्छा, प्रार्थना, आदेश/अनुमति तथा सम्भावना आदि भावों को व्यक्त करने के लिए किया जाता है। अंग्रेज़ी में इसके अर्थ के लिए प्रायः should, may, ought to आदि शब्दों का प्रयोग होता है। पठ् धातु — विधिलिङ् लकार पुरुष एकवचन- द्विवचन- बहुवचन प्रथम पुरुष- पठेत्- पठेताम्- पठेयुः मध्यम पुरुष -पठेः- पठेतम्-- पठेत उत्तम पुरुष- पठेयम् -पठेव -पठेम

वाक्य-प्रयोग

  1. बालकः पुस्तकं पठेत्।

बालक को पुस्तक पढ़नी चाहिए। The boy should read a book.

  1. बालकौ पुस्तकं पठेताम्।

दोनों बालकों को पुस्तक पढ़नी चाहिए। The two boys should read a book.

  1. बालकाः पुस्तकं पठेयुः।

बालकों को पुस्तक पढ़नी चाहिए। The boys should read a book.

  1. अहं प्रतिदिनं संस्कृतं पठेयम्।

मुझे प्रतिदिन संस्कृत पढ़नी चाहिए। I should study Sanskrit every day.

  1. वयं प्रतिदिनं परिश्रमं कुर्याम।

हमें प्रतिदिन परिश्रम करना चाहिए। We should work hard every day.

  1. वयं गृहं गच्छेम।

हमें घर जाना चाहिए। We should go home. कुछ प्रमुख धातुओं के विधिलिङ् रूप धातु विधिलिङ् रूप अर्थ कृ कुर्यात् should do अस् स्यात् should/may be भू भवेत् should/may become/be दृश् पश्येत् should see गम् गच्छेत् should go पठ् पठेत् should read

संक्षिप्त रूप में विधिलिङ् = इच्छा/प्रार्थना/सम्भावना आदि का बोध जैसे— पठेत् = पढ़ना चाहिए / should read कुर्यात् = करना चाहिए / should do गच्छेत् = जाना चाहिए / should go भवेत् = होना चाहिए / may/should be